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वसई-विरार के 95 Redevelopment Projects में FSI का क्या है पूरा मामला? जानिए कहां फंसा पेंच

वसई-विरार के 95 redevelopment projects में additional FSI permissions पर VVCMC की जांच और विवाद
वसई-विरार में 95 Redevelopment Projects की Additional FSI मंजूरियों को लेकर विवाद।

वसई-विरार: वसई-विरार शहर में 95 redevelopment projects को लेकर Floor Space Index यानी FSI का बड़ा विवाद सामने आया है। इस मामले के कारण कई projects में construction, Occupancy Certificate (OC) और property registration जैसी प्रक्रियाएं प्रभावित हुई हैं।

इस पूरे मामले को लेकर सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि इन सभी 95 इमारतों को सीधे तौर पर “अवैध इमारत” घोषित नहीं किया गया है। असली विवाद इन redevelopment projects को पहले दी गई additional FSI की मंजूरी को लेकर है।

क्या है 95 बिल्डिंग का पूरा मामला?

मामले की जड़ additional FSI से जुड़ी है।

FSI यानी Floor Space Index से तय होता है कि किसी जमीन पर कितनी construction की जा सकती है। Redevelopment projects में पुराने tenants या occupants को दोबारा जगह देने और project को पूरा करने के लिए नियमों के तहत कुछ मामलों में additional FSI का लाभ मिल सकता है।

लेकिन सवाल यह उठा कि वसई-विरार के इन redevelopment projects में जिस नियम के आधार पर additional FSI मंजूर की गई थी, क्या वह नियम वास्तव में इन projects पर लागू होता था?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वर्ष 2023 में तत्कालीन VVCMC Municipal Commissioner Anilkumar Pawar और तत्कालीन Town Planning Officer Y. S. Reddy के कार्यकाल में redevelopment projects में tenants से संबंधित additional FSI का लाभ देने की अनुमति दी गई थी। इसके लिए UDCPR के provisions का आधार लिया गया था।

बाद में VVCMC के नए प्रशासन ने इन permissions की समीक्षा की और additional FSI देने के लिए इस्तेमाल किए गए नियम की applicability पर सवाल खड़ा किया।

यहीं से 95 redevelopment projects का पूरा विवाद शुरू हुआ।

आखिर FSI में गड़बड़ी का आरोप क्या है?

सरल भाषा में सवाल यह है कि—

क्या redevelopment के नाम पर इन projects को जितनी additional FSI दी गई, उतनी FSI देने की अनुमति संबंधित नियमों में थी या नहीं?

पहले के VVCMC administration ने जिस provision की व्याख्या करके additional FSI मंजूर की, बाद के administration ने उसी interpretation पर आपत्ति जताई।

इसलिए इस मामले को सीधे “fake FSI scam साबित हो गया” कहना फिलहाल उचित नहीं होगा।

ज्यादा सही बात यह है कि 95 redevelopment projects में additional FSI की पहले दी गई मंजूरियों की वैधता और नियमों के अनुसार उनकी applicability की दोबारा जांच की जा रही है।

VVCMC ने क्या कार्रवाई की?

मामला सामने आने के बाद संबंधित projects में आगे की construction और Occupancy Certificate की प्रक्रिया प्रभावित हुई।

Property registration का मामला भी सामने आया और संबंधित projects में flats तथा shops की sale deed registration पर असर पड़ा।

Developers को notices देकर उनका पक्ष रखने के लिए hearings की प्रक्रिया भी शुरू की गई।

सितंबर 2026 तक 95 में से बड़ी संख्या में projects के developers की hearings पूरी किए जाने की खबरें सामने आईं। इसके बाद हर project के documents, sanctioned FSI और permissions की अलग-अलग जांच करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।

Developers का क्या कहना है?

Developers की तरफ से इस कार्रवाई का विरोध किया गया।

उनका मुख्य तर्क यह है कि उन्होंने अपनी मर्जी से additional construction नहीं की, बल्कि उस समय VVCMC द्वारा जारी permissions और sanctioned plans के आधार पर projects का construction किया।

यानी developers का सवाल है कि अगर Municipal Corporation के competent authorities ने खुद permissions जारी की थीं और उन्हीं permissions के आधार पर construction हुआ, तो बाद में administration बदलने पर उसी construction को गलत कैसे माना जा सकता है?

यहीं इस मामले का एक बड़ा कानूनी सवाल खड़ा होता है।

अगर Municipal Corporation द्वारा जारी permission बाद में नियमों के विपरीत पाई जाती है, तो जिम्मेदारी किसकी होगी—developer की, architect की, permission देने वाले अधिकारियों की या सभी की भूमिका अलग-अलग जांची जाएगी?

Anilkumar Pawar की भूमिका क्या है?

95-project मामले में तत्कालीन VVCMC Commissioner Anilkumar Pawar का नाम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि विवादित additional FSI permissions उनके कार्यकाल के दौरान दी गई बताई गई हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स में तत्कालीन Town Planning Officer Y. S. Reddy का नाम भी सामने आया है।

लेकिन यहां बहुत महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है।

सिर्फ यह तथ्य कि permissions किसी अधिकारी के कार्यकाल में दी गई थीं, अपने आप यह साबित नहीं करता कि उस अधिकारी ने व्यक्तिगत रूप से fraud किया।

इसलिए जब तक किसी सरकारी जांच, FIR, chargesheet, court order या competent authority की final finding में व्यक्तिगत wrongdoing स्थापित न हो, तब तक “Anilkumar Pawar ने fake FSI देकर fraud किया” जैसे वाक्य को तथ्य के रूप में लिखना उचित नहीं होगा।

सुरक्षित और तथ्यात्मक भाषा यह होगी कि Anilkumar Pawar के कार्यकाल में दी गई additional FSI permissions की बाद के VVCMC administration द्वारा समीक्षा की गई और उनकी legality/applicability पर सवाल उठे।

महाराष्ट्र सरकार तक पहुंचा मामला

95 projects का विवाद बढ़ने के बाद मामला Maharashtra Urban Development Department तक पहुंचा।

इसके बाद महत्वपूर्ण बात यह सामने आई कि सभी 95 projects को एक ही नजर से देखने के बजाय हर project की अलग-अलग जांच करके फैसला किया जाए।

इसका मतलब यह है कि 95 projects की स्थिति जरूरी नहीं कि एक जैसी हो।

किसी project में FSI calculation का विवाद हो सकता है, किसी में permission के interpretation का, किसी में construction पहले ही काफी आगे बढ़ चुका हो सकता है और किसी में homebuyers या पुराने tenants के अधिकार जुड़े हो सकते हैं।

इसीलिए project-wise scrutiny महत्वपूर्ण हो जाती है।

अगर अधिकारी, Developer या Architect की गलती मिली तो?

सरकारी स्तर पर हुई प्रक्रिया में यह बात भी महत्वपूर्ण है कि scrutiny में अगर किसी developer, architect या civic official की तरफ से नियमों के खिलाफ additional FSI sanction करने या उसका अनुचित लाभ लेने की जिम्मेदारी सामने आती है, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई का सवाल उठ सकता है।

यानी जांच सिर्फ buildings तक सीमित नहीं है।

यह भी देखना जरूरी होगा कि permission किसने मांगी, architect ने किस नियम के तहत proposal बनाया, Town Planning Department ने उसकी scrutiny कैसे की, competent authority ने permission किस आधार पर दी और developer ने sanctioned permission के मुकाबले actual construction कितना किया।

यही chain इस पूरे मामले की असली तस्वीर साफ कर सकती है।

Homebuyers और पुराने रहवासियों पर पड़ा असर

इस पूरे विवाद में सबसे ज्यादा परेशानी उन सामान्य लोगों को हो सकती है जिन्होंने इन projects में घर खरीदे हैं या पुराने tenants हैं जो redevelopment के बाद अपने नए घर का इंतजार कर रहे हैं।

अगर OC रुकता है तो completed building में possession प्रभावित हो सकता है।

Registration पर रोक होने से flat या shop की sale deed registration अटक सकती है।

इसके अलावा bank loan, resale और property transactions जैसी चीजों पर भी असर पड़ सकता है।

इसी वजह से मामले में homebuyers और original residents के हितों को ध्यान में रखते हुए project-wise समाधान निकालने की जरूरत सामने आई है।

क्या सभी 95 Buildings Illegal हैं?

नहीं, उपलब्ध जानकारी के आधार पर अभी ऐसा कहना सही नहीं होगा।

अगर सभी 95 projects की अलग-अलग जांच की जा रही है, तो इसका मतलब यह नहीं निकाला जा सकता कि सभी 95 buildings को अंतिम रूप से illegal घोषित कर दिया गया है।

इसी तरह यह कहना भी सही नहीं होगा कि सभी 95 buildings को तोड़ा जाएगा।

असल मुद्दा additional FSI permissions की वैधता, उनका calculation, संबंधित नियमों की applicability और उसके आधार पर हुए construction की project-wise जांच का है।

95 बिल्डिंग मामले में असली सवाल

इस पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब redevelopment projects को additional FSI दी गई, तब VVCMC ने किस UDCPR provision के तहत इसकी अनुमति दी और क्या वह provision वास्तव में इन projects पर लागू होता था?

अगर permission नियमों के मुताबिक थी तो बाद में उसे रोकने का आधार क्या है?

और अगर permission नियमों के मुताबिक नहीं थी, तो वह Town Planning scrutiny और Municipal Corporation की approval process से पास कैसे हुई?

अगर developers ने official sanctioned permissions पर भरोसा करके करोड़ों रुपये का construction किया, तो उनकी जिम्मेदारी कितनी है?

और अगर permissions देने में किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन हुआ, तो उस समय file process और approve करने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी क्या होगी?

इन सवालों के जवाब ही 95-building मामले का असली सच सामने लाएंगे।

निष्कर्ष

वसई-विरार के 95 redevelopment projects का मामला सीधे तौर पर “95 illegal buildings” का मामला नहीं है।

यह मुख्य रूप से redevelopment projects में दी गई additional FSI और उस FSI को मंजूरी देने के लिए इस्तेमाल किए गए नियमों की interpretation तथा legality का विवाद है।

पहले administration के दौरान additional FSI permissions दी गईं। बाद के administration ने उन permissions पर सवाल उठाया। इसके बाद construction, OC और registration जैसी प्रक्रियाएं प्रभावित हुईं और developers को hearings का मौका दिया गया।

अब सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हर project की अलग-अलग जांच करके यह तय किया जाए कि किस project में कितनी FSI वैध थी, कितनी construction हुई, permission किस आधार पर दी गई और अगर नियमों का उल्लंघन हुआ तो उसकी वास्तविक जिम्मेदारी किसकी है।

इसलिए फिलहाल इस मामले को “95 redevelopment projects में additional FSI approvals की जांच और विवाद” कहना ज्यादा तथ्यात्मक है। इसे सीधे “95 illegal buildings” या किसी अधिकारी द्वारा किया गया “95-building FSI fraud” घोषित करना तब तक उचित नहीं होगा, जब तक सक्षम जांच एजेंसी या अदालत से ऐसा निष्कर्ष सामने नहीं आता।

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