मुंबई, 7 नवंबर 2026: महाराष्ट्र सरकार ने मातोश्री ग्राम समृद्धि खेत-पानंद सड़क योजना के लंबित कामों के लिए 116 करोड़ रुपये जारी किए हैं। यह राशि राज्य रोजगार गारंटी योजना के तहत पूरक कुशल अनुदान के रूप में दी गई है। सरकार का कहना है कि फंड की कमी से अटके सड़क कार्यों को इससे गति मिलेगी और किसानों के लिए खेत से गांव तथा मुख्य सड़क तक पहुंच आसान हो सकेगी।

फंड जारी हुआ, अभी काम पूरा होना बाकी

राशि जारी होने का मतलब यह नहीं है कि सभी खेत-पानंद सड़कें तैयार हो गई हैं। यह पैसा स्वीकृत और लंबित परियोजनाओं में कुशल काम तथा निर्माण सामग्री के हिस्से के लिए उपलब्ध कराया गया है। जिलेवार कितना धन जाएगा, कितने किलोमीटर सड़क बनेगी और हर काम की समयसीमा क्या होगी, इसका विस्तृत ब्योरा अभी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है। इसलिए योजना की वास्तविक प्रगति का आकलन आवंटन, टेंडर, काम शुरू होने और पूर्णता प्रमाणपत्र के आधार पर होगा।

किसानों के लिए खेत-पानंद सड़क क्यों जरूरी?

खेत-पानंद सड़कें खेती की जमीन को गांव और मुख्य सड़क से जोड़ती हैं। बरसात में कच्चा रास्ता खराब होने पर बीज, खाद, मशीन और मजदूर खेत तक ले जाना मुश्किल हो जाता है। फसल तैयार होने के बाद उपज को मंडी तक पहुंचाने में देरी और अतिरिक्त खर्च भी बढ़ सकता है। हर मौसम में चलने योग्य सड़क मिलने पर ट्रैक्टर, छोटे मालवाहक वाहन और आपात सेवाओं की आवाजाही बेहतर हो सकती है।

राज्य की योजना विभाग की जानकारी के अनुसार, यह योजना विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों के अभिसरण से चलाई जाती है। मनरेगा से अकुशल श्रम का हिस्सा और राज्य रोजगार गारंटी योजना से कुशल काम व सामग्री का हिस्सा जोड़ा जाता है। इसी वजह से कुशल अनुदान की कमी कई परियोजनाओं के लिए रुकावट बन सकती है।

सूखे जैसे हालात के बीच फैसला

राज्य के कई हिस्सों में किसान सूखे जैसे हालात और बढ़ती लागत से जूझ रहे हैं। सरकार ने रोजगार गारंटी योजना मंत्री भरत गोगावले के निर्देश के बाद राशि जारी करने की बात कही है। प्रशासन का दावा है कि इससे ग्रामीण बुनियादी ढांचे के काम नहीं रुकेंगे और खेत तक पहुंच सुधरेगी।

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अब नजर इस बात पर रहेगी कि 116 करोड़ रुपये की राशि किन जिलों और किन लंबित कार्यों तक कब पहुंचती है। स्थानीय स्तर पर काम की गुणवत्ता, जल निकासी और सड़क के रखरखाव की व्यवस्था भी उतनी ही महत्वपूर्ण होगी।