विरार: विरार पूर्व के चंदनसार इलाके में घनी आबादी के बीच कथित तौर पर चल रही एक अवैध पटाखा निर्माण इकाई पर क्राइम ब्रांच यूनिट-2 ने कार्रवाई की है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, ‘मर्चंट’ नाम की पटाखा दुकान के ऊपर पहली और दूसरी मंजिल पर पटाखे बनाने का काम चल रहा था। छापेमारी के दौरान दोनों मंजिलों पर कुल 17 मजदूर काम करते मिले।

कार्रवाई के दौरान पुलिस को पटाखे तैयार करने में इस्तेमाल होने वाले विस्फोटक रसायन, कच्चा माल, पैकिंग सामग्री और तैयार उत्पाद मिलने की जानकारी है। मौके से उपलब्ध तस्वीरों में बड़ी संख्या में पटाखों के पैकेट, गत्ते के डिब्बे और निर्माण प्रक्रिया से जुड़ी सामग्री दिखाई दे रही है। बरामद सामान की मात्रा, कीमत और रासायनिक संरचना की आधिकारिक जानकारी अभी सामने आना बाकी है।

दुकान के ऊपर दो मंजिलों पर चल रहा था काम

प्राप्त जानकारी के अनुसार, चंदनसार स्थित दुकान में अलग-अलग नामचीन कंपनियों के पटाखे थोक दर पर बेचे जाते हैं। क्राइम ब्रांच यूनिट-2 को सूचना मिली थी कि दुकान की ऊपरी दो मंजिलों का इस्तेमाल बिना जरूरी अनुमति पटाखे बनाने के लिए किया जा रहा है। टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की तो दोनों मंजिलों पर मजदूर पटाखे तैयार करते मिले।

अब जांच का प्रमुख सवाल यह है कि निर्माण इकाई के पास विस्फोटक पदार्थ रखने, पटाखे बनाने और तैयार माल बेचने के लिए आवश्यक लाइसेंस और सुरक्षा मंजूरियां थीं या नहीं। पुलिस संबंधित दस्तावेजों के साथ मौके से मिले कच्चे माल और तैयार पटाखों की भी जांच कर रही है।

बड़े ब्रांड के नाम पर नकली पटाखे बनाने का संदेह

पुलिस को संदेह है कि यहां प्रतिष्ठित कंपनियों के नाम और पैकेजिंग का इस्तेमाल कर नकली पटाखे तैयार किए जा रहे थे। यह अभी जांच का विषय है और किसी कंपनी या कारोबारी की भूमिका आधिकारिक जांच पूरी होने से पहले तय नहीं मानी जा सकती। पैकेट, लेबल और खरीदी-बिक्री के रिकॉर्ड की पड़ताल से पता चलेगा कि तैयार माल कहां भेजा जाता था और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे।

नाबालिगों से काम कराने के आरोप की भी जांच जरूरी

मामले में नाबालिग बच्चों से काम कराए जाने का आरोप भी सामने आया है। हालांकि उपलब्ध जानकारी में मजदूरों की उम्र और मौके पर नाबालिगों की मौजूदगी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए पुलिस और श्रम विभाग की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। यदि कोई नाबालिग काम करते मिला, तो बाल श्रम से जुड़े कानूनों के तहत अलग कार्रवाई की जा सकती है।

घनी आबादी के बीच बड़ी दुर्घटना का खतरा

रिहायशी क्षेत्र की इमारत में विस्फोटक रसायनों और पटाखा निर्माण सामग्री का भंडारण आसपास रहने वाले लोगों के लिए गंभीर खतरा बन सकता था। पटाखे बनाते समय मामूली चिंगारी, गलत रासायनिक मिश्रण या बिजली की गड़बड़ी भी आग और विस्फोट का कारण बन सकती है। इमारत में आपात निकास, अग्निशमन उपकरण और सुरक्षित दूरी के नियमों का पालन किया गया था या नहीं, इसकी जांच भी महत्वपूर्ण होगी।

इससे पहले मेट्रो सिटी समाचार ने वसई-विरार में पटाखा स्टॉल और ग्रीन क्रैकर्स से जुड़े नियमों पर विस्तृत जानकारी दी थी। चंदनसार की कार्रवाई ने यह सवाल फिर खड़ा किया है कि बिक्री के साथ-साथ निर्माण और भंडारण वाली जगहों की नियमित जांच कितनी प्रभावी है।

बीट चौकी के पास गतिविधि, स्थानीय निगरानी पर सवाल

यह जगह विरार पुलिस स्टेशन की सीमा में और साईंनाथ नगर बीट चौकी के नजदीक बताई जा रही है। ऐसे में दो मंजिलों पर कथित निर्माण गतिविधि कब से चल रही थी और स्थानीय स्तर पर इसका पता क्यों नहीं चला, यह जांच का अहम हिस्सा है। पुलिस यह भी देख सकती है कि रसायन और कच्चा माल कहां से आता था तथा तैयार पटाखों की आपूर्ति किन बाजारों या दुकानों में की जाती थी।

नालासोपारा के राधा नगर में हाल में हुई आग की घटना ने भी रिहायशी इलाकों में ज्वलनशील सामग्री के सुरक्षित भंडारण की जरूरत सामने रखी थी। चंदनसार मामले में समय रहते कार्रवाई होने से संभावित खतरा टलने की बात कही जा रही है, लेकिन जिम्मेदारी तय करने के लिए दस्तावेज और सुरक्षा व्यवस्था की विस्तृत जांच जरूरी है।

केस, हिरासत और धाराओं की आधिकारिक जानकारी का इंतजार

खबर लिखे जाने तक कितने लोगों को हिरासत में लिया गया, किसके खिलाफ मामला दर्ज हुआ और कौन-सी कानूनी धाराएं लगाई गईं, इसकी विस्तृत आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं थी। बरामद रसायनों की फॉरेंसिक जांच, लाइसेंस संबंधी दस्तावेज और मजदूरों के बयान सामने आने के बाद मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।