मुंबई, 17 अक्टूबर: कांदिवली रेलवे स्टेशन पर शुक्रवार, 16 अक्टूबर की शाम टिकट चेकिंग के दौरान शुरू हुआ विवाद बढ़ने पर GRP और RPF को हस्तक्षेप करना पड़ा। पश्चिम रेलवे के मुताबिक, बिना वैध टिकट मिली एक महिला को रोकने के प्रयास में मुख्य टिकट निरीक्षक प्रिया आंबवडे गिर गईं। इसी घटनाक्रम में महिला यात्री के कपड़े आंशिक रूप से फट गए। बाद में कुछ लोगों ने टिकट निरीक्षक के व्यवहार पर सवाल उठाते हुए उनसे सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की।
पश्चिम रेलवे के मुंबई सेंट्रल डिवीजन की ओर से उपलब्ध कराए गए विवरण के अनुसार, घटनाक्रम 16 अक्टूबर की शाम करीब 7:30 बजे शुरू हुआ। मुख्य टिकट निरीक्षक प्रिया आंबवडे कांदिवली स्टेशन के पश्चिमी सर्कुलेटिंग एरिया में नियमित टिकट जांच कर रही थीं। इसी दौरान करीब 25 वर्षीय एक महिला बिना वैध टिकट मिली।
पहले बिना जुर्माना छोड़ने का अनुरोध, फिर निकलने की कोशिश का आरोप
रेलवे के मुताबिक, महिला ने शुरुआत में बिना जुर्माना लिए छोड़ देने का अनुरोध किया। हालांकि, टिकट निरीक्षक ने रेलवे नियमों के अनुसार कार्रवाई जारी रखी। इसी बीच बिना टिकट मिली एक अन्य महिला ने निर्धारित जुर्माना भर दिया।
रेलवे का आरोप है कि पहली महिला ने टिकट जांच की प्रक्रिया से बचने के लिए स्टेशन से निकलने की कोशिश की। टिकट निरीक्षक ने उसे रोकने का प्रयास किया, जिसके दौरान उनका संतुलन बिगड़ गया और वह प्लेटफॉर्म पर गिर गईं। इसी घटनाक्रम में महिला यात्री के कपड़े आंशिक रूप से फट गए। हालांकि, कपड़े किस तरह फटे, इसका स्पष्ट विवरण प्रेस नोट में नहीं दिया गया है।
टिकट चेकिंग कार्यालय में कार्रवाई के दौरान हस्तक्षेप का आरोप
रेलवे के बयान के अनुसार, महिला को आगे की कार्रवाई के लिए टिकट चेकिंग कार्यालय लाया गया। आरोप है कि उसके साथ मौजूद तीन से चार अज्ञात महिलाओं ने हस्तक्षेप किया और उसे जबरन रेलवे परिसर से ले गईं। रेलवे ने इसे आधिकारिक प्रक्रिया में बाधा बताया है।
इसके बाद खुद को पत्रकार बताने वाले एक व्यक्ति ने टिकट निरीक्षक से बयान लेने की कोशिश की। टिकट निरीक्षक ने उस समय टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
कार्यालय के बाहर जुटे लोग, व्यवहार पर लगाए आरोप
इसके बाद टिकट चेकिंग कार्यालय के बाहर लोगों का एक समूह जमा हो गया। वहां मौजूद लोगों ने टिकट निरीक्षक पर अनुचित भाषा और अभद्र व्यवहार के आरोप लगाए। रेलवे के अनुसार, समूह ने उन पर सार्वजनिक रूप से माफी मांगने का दबाव बनाया, लेकिन उन्होंने माफी मांगने से इनकार कर दिया।
इन आरोपों के संबंध में संबंधित महिला यात्री और मौके पर मौजूद अन्य लोगों का विस्तृत पक्ष उपलब्ध कराए गए प्रेस नोट में शामिल नहीं है।
GRP और RPF के हस्तक्षेप के बाद अधिकांश लोग हटे
विवाद बढ़ने पर सरकारी रेलवे पुलिस यानी GRP और रेलवे सुरक्षा बल यानी RPF ने हस्तक्षेप किया। इसके बाद अधिकांश लोग वहां से चले गए।
प्रेस नोट में दिए गए उस समय के स्थिति अपडेट के मुताबिक, कुछ लोग मौके पर मौजूद थे और रेलवे कर्मचारियों तथा यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए निगरानी जारी थी।
रेलवे ने कहा—शिकायतों की जांच साक्ष्यों के आधार पर हो
पश्चिम रेलवे ने अपने बयान में कहा कि ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों को बिना डर, बाधा या अनुचित दबाव के काम करने का अवसर मिलना चाहिए। टिकट जांच से बचने और आधिकारिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने के प्रयास गंभीर चिंता के विषय हैं।
रेलवे ने यात्रियों से अधिकृत कर्मचारियों का सहयोग करने की अपील की। साथ ही कहा कि कर्मचारियों के व्यवहार से जुड़ी शिकायतों की जांच उचित माध्यमों से, निष्पक्ष तरीके से और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होनी चाहिए। रेलवे कर्मचारियों की सुरक्षा और गरिमा के साथ यात्रियों के साथ उचित व्यवहार भी महत्वपूर्ण है।
यह संयुक्त रिपोर्ट उपलब्ध कराए गए रेलवे के दोनों प्रेस नोट पर आधारित है।