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परमबीर सिंह के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट की मांग पर NIA कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा, कथित झूठे हलफनामे को लेकर गंभीर सवाल

परमबीर सिंह गिरफ्तारी वारंट मामला | NIA Court Mumbai
परमबीर सिंह के खिलाफ कार्रवाई की मांग पर विशेष NIA अदालत में सुनवाई। अदालत का आदेश आना बाकी।

मुंबई: मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह के खिलाफ कथित झूठा हलफनामा दाखिल करने के मामले में विशेष NIA अदालत में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। पूर्व सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) भीमराज गाडगे की ओर से दाखिल याचिका में परमबीर सिंह के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारी वारंट जारी करने की मांग की गई है। दोनों पक्षों से जुड़ी दलीलों के बाद अदालत ने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है।

गाडगे पक्ष की ओर से अधिवक्ता निलेश सी. ओझा ने परमबीर सिंह के जवाबी हलफनामे की ग्राह्यता पर आपत्ति जताई। साथ ही, हलफनामे पर कथित हस्ताक्षर, नोटरीकरण की प्रक्रिया और संबंधित CCTV फुटेज को लेकर भी सवाल उठाए गए।

हालांकि, इन आरोपों पर अदालत का अंतिम निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है। परमबीर सिंह के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी होने की भी पुष्टि नहीं हुई है।

जवाबी हलफनामा रिकॉर्ड पर लेने का विरोध

सुनवाई के दौरान परमबीर सिंह की ओर से जवाबी हलफनामा दाखिल किए जाने की जानकारी सामने आई। इसके विरोध में पूर्व ACP भीमराज गाडगे की ओर से उपस्थित अधिवक्ता निलेश ओझा ने कानूनी आपत्ति दर्ज कराई।

गाडगे पक्ष के मुताबिक, अधिवक्ता ओझा ने सुप्रीम कोर्ट और बॉम्बे हाईकोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए तर्क दिया कि न्यायिक कार्यवाही में कथित झूठे साक्ष्य या हलफनामे की प्रारंभिक जांच के दौरान संबंधित व्यक्ति को जवाबी हलफनामा दाखिल करके कार्यवाही में हस्तक्षेप करने का स्वतः अधिकार नहीं होता।

उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि परमबीर सिंह के जवाबी हलफनामे को रिकॉर्ड पर स्वीकार न किया जाए और मामले में कानून के अनुसार आगे की कार्यवाही की जाए।

यह गाडगे पक्ष की कानूनी दलील है। जवाबी हलफनामा रिकॉर्ड पर लिया जाएगा या नहीं, इसका निर्णय अदालत को करना है।

हलफनामे पर हस्ताक्षर और नोटरी कार्यालय के CCTV को लेकर सवाल

मामले में सबसे महत्वपूर्ण विवाद परमबीर सिंह के कथित हलफनामे की प्रामाणिकता से जुड़ा है।

गाडगे पक्ष के अधिवक्ताओं ने दावा किया कि संबंधित नोटरी कार्यालय और आसपास के CCTV फुटेज में परमबीर सिंह की कथित उपस्थिति दिखाई नहीं देती। इसके अतिरिक्त हलफनामे पर मौजूद दो हस्ताक्षरों में अंतर होने की बात भी कही गई।

इन परिस्थितियों का हवाला देते हुए अधिवक्ताओं ने हलफनामे पर हस्ताक्षर किए जाने और नोटरीकरण की पूरी प्रक्रिया की जांच की आवश्यकता बताई।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, अदालत ने पूर्व की कार्यवाही में संबंधित नोटरी को नोटिस जारी करने तथा आवश्यक रिकॉर्ड और CCTV फुटेज के संरक्षण से जुड़े निर्देश दिए थे।

हालांकि, CCTV फुटेज की प्रामाणिकता, उसकी संपूर्णता और हस्ताक्षरों में कथित अंतर के संबंध में स्वतंत्र फोरेंसिक जांच या न्यायिक निष्कर्ष की पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।

भीमराज गाडगे को अनिल देशमुख का ‘कठपुतली’ बताने पर आपत्ति

सुनवाई के दौरान पूर्व ACP भीमराज गाडगे को महाराष्ट्र के पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख का ‘स्टूज’ यानी कठपुतली बताए जाने के कथित बयान पर भी विवाद हुआ।

गाडगे पक्ष ने इस कथन को तथ्यहीन बताते हुए आपत्ति जताई।

उनके अधिवक्ताओं ने दलील दी कि भीमराज गाडगे स्वयं अनिल देशमुख के खिलाफ चल रही कार्यवाही में गवाह हैं। ऐसे में उन्हें देशमुख के प्रभाव में काम करने वाला व्यक्ति बताना उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाने का प्रयास है।

यह विवाद भी पक्षकारों के परस्पर दावों से जुड़ा है और इसकी सत्यता का न्यायिक निर्धारण होना बाकी है।

दिशा सालियन मामले का भी किया गया उल्लेख

गाडगे पक्ष की ओर से सुनवाई के दौरान दिशा सालियन प्रकरण का उल्लेख भी किए जाने की जानकारी दी गई है।

अधिवक्ताओं के अनुसार, भीमराज गाडगे दिशा सालियन मामले से जुड़ी जांच में CBI के समक्ष भी गवाह हैं। इसके अलावा दिशा सालियन के पिता सतीश सालियन की ओर से कथित तौर पर दाखिल ₹2,000 करोड़ के मानहानि दावे का भी जिक्र किया गया।

हालांकि, इन दोनों मामलों और मौजूदा हलफनामा विवाद के बीच कानूनी संबंध क्या है, यह अदालत के रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेजों के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगा।

सचिन वाजे सहित अन्य लोग अदालत में मौजूद

उपलब्ध विवरण के अनुसार, सुनवाई के दौरान अधिवक्ता निलेश ओझा, तन्वीर निजाम, अभिषेक मिश्रा और अन्य अधिवक्ता उपस्थित थे। पूर्व पुलिस अधिकारी सचिन वाजे की मौजूदगी की भी जानकारी सामने आई है।

गाडगे पक्ष ने अदालत से मांग की कि न्यायिक प्रक्रिया में कथित तौर पर झूठा हलफनामा दाखिल करने के आरोपों की कानून के अनुसार जांच और आवश्यक कार्रवाई की जाए।

एंटीलिया मामले से भी जुड़ा है विवाद का संदर्भ

पूर्व ACP भीमराज गाडगे और परमबीर सिंह के बीच न्यायिक विवाद पहले से चल रहा है।

सितंबर 2026 में प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, गाडगे ने विशेष NIA अदालत में आवेदन दाखिल कर एंटीलिया बम धमकी और कारोबारी मनसुख हिरन की हत्या से जुड़े मामले में परमबीर सिंह की कथित भूमिका की आगे जांच कराने की मांग की थी।

वहीं, अक्टूबर 2026 की शुरुआत में आई रिपोर्टों के अनुसार, NIA ने अदालत को बताया था कि वह एंटीलिया मामले के ट्रायल में परमबीर सिंह सहित कुछ गवाहों के बयानों पर भरोसा नहीं करेगी।
हालांकि, इन घटनाक्रमों का अर्थ यह नहीं है कि परमबीर सिंह के खिलाफ मौजूदा हलफनामा संबंधी आरोप साबित हो गए हैं।

अब अदालत के आदेश पर नजर

विशेष NIA अदालत के आगामी आदेश से यह स्पष्ट हो सकेगा कि परमबीर सिंह के जवाबी हलफनामे पर क्या निर्णय लिया जाता है और गाडगे की ओर से उठाए गए आरोपों पर आगे कौन-सी कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

फिलहाल गिरफ्तारी वारंट जारी करने की मांग पर अदालत का फैसला आना बाकी है।

Metro City Samachar इस मामले में अदालत के आगामी आदेश और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया पर नजर बनाए हुए है।

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