महाराष्ट्र में रिक्षा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य किए जाने के फैसले के बाद अब भाषा को लेकर नया राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। इसी बीच भाजपा नेता और महाराष्ट्र के पूर्व गृहराज्यमंत्री कृपाशंकर सिंह ने उत्तर प्रदेश के स्कूलों में वैकल्पिक भाषा के रूप में मराठी पढ़ाने की मांग उठाई है।
भाईंदर में मीडिया से बातचीत के दौरान कृपाशंकर सिंह ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भी लिखा है। उनका कहना है कि महाराष्ट्र में रहने और रोजगार करने वाले लोगों के लिए मराठी भाषा सीखना जरूरी है।
टैक्सी चालकों को मराठी बोलना होगा अनिवार्य
दरअसल, महाराष्ट्र सरकार में परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने हाल ही में घोषणा की थी कि राज्य में व्यावसायिक परमिट लेने वाले रिक्षा और टैक्सी चालकों को मराठी बोलना अनिवार्य होगा। मराठी न बोल पाने वाले चालकों के परमिट रद्द किए जाने की चेतावनी भी दी गई थी। इसके बाद मुंबई और उपनगरों में रहने वाले गैर-मराठी चालकों के बीच चिंता का माहौल बन गया।
हालांकि बाद में सरकार ने स्पष्ट किया कि 15 अगस्त तक किसी भी चालक पर कार्रवाई नहीं की जाएगी। साथ ही मराठी सीखने के लिए व्यावहारिक पुस्तिका भी जारी की गई है।
इसी मुद्दे पर कृपाशंकर सिंह ने कहा कि “जिस राज्य में हम रहते हैं, वहां की मातृभाषा सीखना और बोलना जरूरी है। इससे रोजगार और सामाजिक जीवन दोनों में फायदा होता है। इसी सोच के साथ हमने 4 जून 2022 को योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर उत्तर प्रदेश के स्कूलों में मराठी को वैकल्पिक भाषा के रूप में शामिल करने की मांग की थी।”
उन्होंने दावा किया कि यदि उत्तर प्रदेश में मराठी सिखाई जाएगी तो वहां से महाराष्ट्र आने वाले श्रमिकों और कामगारों को रोजगार पाने में आसानी होगी और उन्हें भाषा संबंधी परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा।
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