वसई में तहसीलदार कार्यालय से जुड़ा एक बड़ा भ्रष्टाचार मामला सामने आया है, जहां अनधिकृत निर्माण पर कार्रवाई से बचाने के नाम पर लाखों रुपये की रिश्वत मांगे जाने का खुलासा हुआ है। ठाणे के लाचलुचपत प्रतिबंधक विभाग (ACB) ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए एक निजी व्यक्ति को 7 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है।

जानकारी के अनुसार, वसई पूर्व के देपिवली इलाके में स्थित एक जमीन से जुड़े मामले में शिकायतकर्ता से पहले 40 लाख रुपये की मांग की गई थी, ताकि जमीन को अकृषिक (NA) में परिवर्तित किया जा सके। इसके अलावा, उस जमीन पर मौजूद अनधिकृत निर्माण को बचाने के लिए अलग से 10 लाख रुपये की मांग की गई थी। बाद में दोनों पक्षों के बीच 7 लाख रुपये में सौदा तय हुआ।

ACB ठाणे में शिकायत, बिछाया जाल

इस मांग से परेशान होकर शिकायतकर्ता ने ACB ठाणे में शिकायत दर्ज कराई। जांच के बाद ACB टीम ने मंगलवार को जाल बिछाया और जैसे ही अनिल प्रभाकर चौबल नामक निजी व्यक्ति ने 7 लाख रुपये की नकद राशि स्वीकार की, उसे मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया।

जांच के दौरान यह सामने आया कि इस पूरे मामले में वसई के अपर तहसीलदार (अकृषिक) विनोद बालकृष्ण धोत्रे की भूमिका भी संदिग्ध है और उनका इस प्रकरण से सीधा संबंध बताया जा रहा है। ACB की कार्रवाई की भनक लगते ही धोत्रे मौके से फरार हो गए।

तहसील कार्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार उजागर

फिलहाल, वसई पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज करने की प्रक्रिया जारी है और फरार अधिकारी की तलाश तेज कर दी गई है। इस मामले की जांच ठाणे ACB के वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में की जा रही है।

इस कार्रवाई ने वसई तहसील कार्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार को उजागर कर दिया है, जिससे प्रशासनिक तंत्र पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

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