बायो-माइनिंग, RDF परिवहन और SLF परियोजना में कथित गड़बड़ियों के आरोप; मनोज पाटील के मुद्दा उठाने के बाद पुलिस जांच शुरू
वसई-विरार: वसई-विरार महानगरपालिका के कचरा प्रबंधन से जुड़े कथित बड़े आर्थिक अनियमितता मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। पुराने कचरे के बायो-माइनिंग, RDF (Refuse Derived Fuel) परिवहन और साइंटिफिक लैंडफिल (SLF) परियोजना से जुड़े आरोपों के आधार पर बोळींज पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया है। भाजपा के विपक्ष नेता मनोज पाटील ने इन परियोजनाओं में महानगरपालिका को 64 करोड़ रुपये से अधिक का कथित नुकसान होने का आरोप लगाया था।
मामला पहले महानगरपालिका की महासभा में उठाया गया था। इसके बाद जांच की मांग और लगातार किए गए राजनीतिक फॉलो-अप के बीच अब पुलिस कार्रवाई शुरू हुई है। 26 अगस्त 2026 को भाजपा ने नालासोपारा पश्चिम स्थित अपने कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कथित अनियमितताओं से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक किए थे। इस दौरान मनोज पाटील और भाजपा जिलाध्यक्ष प्रज्ञा पाटील की मौजूदगी में बायो-माइनिंग और कचरा प्रबंधन से जुड़े कई सवाल उठाए गए।
13 लाख टन पुराने कचरे के बायो-माइनिंग पर सवाल
भाजपा के अनुसार, दिसंबर 2023 में महानगरपालिका के घनकचरा विभाग ने नालासोपारा पूर्व स्थित पुराने कचरे के करीब 13 लाख टन के बायो-माइनिंग का काम साई यूटिलिटी कॉन्ट्रैक्टर्स प्राइवेट लिमिटेड को दिया था। इसके लिए 835 रुपये प्रति टन की दर निर्धारित किए जाने की जानकारी दी गई है।
भाजपा का आरोप है कि काम के दौरान महानगरपालिका के निर्देशों और पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी की गई तथा संबंधित सलाहकार संस्था की भूमिका पर भी सवाल उठते हैं।
सबसे बड़ा विवाद कचरे की घनता और उसके आधार पर बने बिलों को लेकर है। भाजपा के मुताबिक अप्रैल 2024 की जांच में कचरे की घनता 340 किलोग्राम प्रति घनमीटर बताई गई थी, जबकि 16 जनवरी 2026 के रिकॉर्ड में यही घनता 840 किलोग्राम प्रति घनमीटर दर्ज की गई। पार्टी का दावा है कि प्राकृतिक रूप से कचरा बैठने के बावजूद उसके आधार पर अधिक मात्रा के बिल तैयार किए गए और करीब 39 करोड़ रुपये की कथित अनियमितता हुई।
हालांकि, एक हालिया रिपोर्ट में FIR से जुड़े आरोपों के संदर्भ में करीब 37.66 करोड़ रुपये के बिल का विशेष उल्लेख किया गया है।
RDF परिवहन में ‘दुचाकी से 27 टन’ का दावा
मामले का दूसरा अहम पहलू RDF के परिवहन से जुड़ा है। भाजपा ने आरोप लगाया कि कुछ दस्तावेजों में Honda Unicorn, Maruti Suzuki Dzire, Tata Indica, Power Tiller और Tata Ace Zip जैसे वाहनों से 26 से 27 टन तक RDF ले जाने का रिकॉर्ड दिखाया गया है।
दस्तावेजों में RDF को Dalmia और UltraTech Cement जैसी कंपनियों तक पहुंचाए जाने के प्रमाणपत्र होने का भी दावा किया गया है। ऐसे में जांच का एक महत्वपूर्ण सवाल यह होगा कि रिकॉर्ड में दर्ज वाहन वास्तव में इतनी मात्रा में सामग्री ले जाने में सक्षम थे या नहीं और संबंधित RDF वास्तव में अपने अंतिम गंतव्य तक पहुंचा था या नहीं।
FIR से संबंधित रिपोर्ट में भी Honda Unicorn समेत छोटे वाहनों के जरिए भारी मात्रा में RDF परिवहन दिखाए जाने की बात सामने आई है।
कथित फर्जी ई-मेल और प्रमाणपत्रों की भी जांच
भाजपा ने यह भी आरोप लगाया कि महानगरपालिका की ओर से पुनः जांच के लिए भेजे गए पत्र का जवाब कथित तौर पर फर्जी ई-मेल आईडी और डोमेन से दिया गया। पार्टी का दावा है कि इन दस्तावेजों के जरिए पुनर्तपासणी को सही साबित करने की कोशिश की गई।
पुलिस जांच में अब यह भी पता लगाया जाएगा कि संबंधित ई-मेल, प्रमाणपत्र और दस्तावेज वास्तव में किसने तैयार किए और उनका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया।
MRF परियोजना में पत्थर उत्खनन का आरोप
भाजपा ने MRF यानी Material Recovery Facility परियोजना में कथित पत्थर उत्खनन का मुद्दा भी उठाया है। आरोप के मुताबिक करीब 10 हजार वर्ग मीटर प्राकृतिक पहाड़ी क्षेत्र में खुदाई कर लगभग 17 हजार ब्रास, यानी करीब 49 हजार घनमीटर पत्थर निकाला गया।
भाजपा के अनुसार, इस पत्थर के लिए महानगरपालिका से करीब 4.09 करोड़ रुपये का भुगतान लिया गया। साथ ही निकाले गए पत्थर की कथित अलग बिक्री का आरोप भी लगाया गया है। पार्टी ने इसे महानगरपालिका के संभावित दोहरे आर्थिक नुकसान से जोड़ा है।
SLF परियोजना पर भी सवाल
Scientific Landfill (SLF) परियोजना भी आरोपों के केंद्र में है। भाजपा के मुताबिक 2015 से 2017 के दौरान केंद्र और राज्य सरकार के 90 प्रतिशत अनुदान से शुरू हुई इस परियोजना का काम खिलारी इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड को दिया गया था।
पार्टी का आरोप है कि इस परियोजना के लिए करीब 24.62 करोड़ रुपये का भुगतान उचित प्रक्रिया के बिना किया गया। भाजपा ने यह भी दावा किया है कि CAG ने करीब 24.64 करोड़ रुपये के खर्च को व्यर्थ ठहराया था। इसके अलावा मई 2017 में IIT पवई द्वारा किए गए तृतीय-पक्ष परीक्षण में कथित खामियों का हवाला भी दिया गया है।
भाजपा के अनुसार, प्रदूषण नियंत्रण संबंधी आवश्यक मंजूरियों के अभाव में आगे चलकर संबंधित प्राधिकरणों और हरित लवाद की कार्रवाई का भी सामना करना पड़ा।
ठेकेदारों और अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग
इस पूरे मामले में भाजपा ने संबंधित ठेकेदारों के साथ-साथ सलाहकार संस्था और महानगरपालिका के अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग की है। पार्टी ने अब तक किए गए भुगतान का फॉरेंसिक ऑडिट कराने और गलत तरीके से भुगतान हुई राशि की वसूली की मांग भी की है।
FIR में दो आरोपी दर्ज
बोळींज पुलिस थाने में दर्ज गु.र.जि.क्र. 474/2026 के अनुसार, महानगरपालिका के घनकचरा प्रबंधन विभाग के सहायक आयुक्त जितेंद्र हेकर नाईक शिकायतकर्ता हैं। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार हिंदकुमार श्रीकांत यादव और अशरफुद्दीन बशीर सय्यद को आरोपी के रूप में दर्ज किया गया है। मामले में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया गया है और जांच पुलिस उपनिरीक्षक किरण वंजारी कर रहे हैं।
एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, मामले में कथित फर्जी प्रमाणपत्रों और दस्तावेजों के आधार पर भुगतान हासिल करने का आरोप लगाया गया है।
अब इन सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे
FIR के बाद पुलिस जांच में बायो-माइनिंग का वास्तविक काम कितना हुआ, बिलों में दिखाई गई कचरे की मात्रा सही थी या नहीं, RDF वास्तव में संबंधित कंपनियों तक पहुंचा था या नहीं, रिकॉर्ड में दर्ज वाहनों ने वास्तव में परिवहन किया था या नहीं और कथित फर्जी ई-मेल व प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल किसने किया—इन सवालों के जवाब तलाशे जाने की उम्मीद है।
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