वसई | 4 नवंबर 2026: वसई-विरार शहर महानगरपालिका के सर डी.एम. पेटिट अस्पताल में मिले एक्सपायरी दवाओं के स्टॉक की जांच आखिर कहां तक पहुंची—इस सवाल पर सूचना का अधिकार कानून के तहत मिला जवाब नई चिंता पैदा कर रहा है। स्वास्थ्य विभाग के जनसूचना अधिकारी ने बताया है कि इस प्रकरण की जांच और कार्रवाई से संबंधित दस्तावेज विभाग के रिकॉर्ड रूम में उपलब्ध नहीं हैं।
यह जवाब अपने-आप में यह साबित नहीं करता कि जांच रिपोर्ट नष्ट कर दी गई या जांच हुई ही नहीं। लेकिन एक संवेदनशील अस्पताल मामले में नियुक्त जांच समिति के दस्तावेज विभागीय अभिलेख में उपलब्ध न होना रिकॉर्ड प्रबंधन, जवाबदेही और कार्रवाई की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न जरूर खड़े करता है।
मई में निरीक्षण के दौरान सामने आया था मामला
मई 2026 में नगरसेवकों द्वारा अस्पताल के औषधि भंडार का निरीक्षण किए जाने के बाद एक्सपायरी दवाओं का स्टॉक मिलने का मामला सामने आया था। इसके बाद महानगरपालिका आयुक्त ने अतिरिक्त आयुक्त दीपक सावंत की अध्यक्षता में चार सदस्यीय जांच समिति गठित की थी। शुरुआती निरीक्षण में उपयोग योग्य और समय सीमा पार कर चुकी दवाओं को अलग-अलग व्यवस्थित रखने के बजाय एक ही स्थान पर रखे जाने की बात सामने आई थी।
उपलब्ध विवरण के अनुसार दस अलग प्रकार की दवाएं समय सीमा पार कर चुकी थीं। हालांकि यह स्पष्ट करना जरूरी है कि अभी ऐसी कोई पुष्ट जानकारी सामने नहीं आई है कि ये दवाएं मरीजों को बांटी गई थीं। स्टॉक का अस्पताल में मिलना और उसका मरीजों तक पहुंचना दो अलग तथ्य हैं; अंतिम जांच रिपोर्ट के बिना दोनों को एक नहीं माना जा सकता।
RTI में क्या पूछा गया और क्या जवाब मिला?
सामाजिक कार्यकर्ता कुमार काकडे ने सूचना का अधिकार कानून के तहत जांच समिति की रिपोर्ट, तय की गई जिम्मेदारी और दोषी पाए गए अधिकारियों या कर्मचारियों पर हुई कार्रवाई का विवरण मांगा था। जवाब में जनसूचना अधिकारी तथा चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. भक्ति चौधरी की ओर से बताया गया कि मांगे गए दस्तावेज चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग के अभिलेख कक्ष में उपलब्ध नहीं हैं।
इस उत्तर के बाद सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक सवाल यह है कि समिति ने अपनी रिपोर्ट किस कार्यालय में और किस तारीख को जमा की थी। रिपोर्ट का inward number, उसकी प्रमाणित प्रति, समिति की बैठक का रिकॉर्ड और आयुक्त कार्यालय से जारी कार्रवाई आदेश कहां है—इन बिंदुओं पर महानगरपालिका का विस्तृत स्पष्टीकरण अभी सामने नहीं आया है।
कार्यकर्ता ने लगाए आरोप, लेकिन जांच जरूरी
कुमार काकडे ने आरोप लगाया है कि मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज होना चाहिए। उन्होंने महापालिका आयुक्त, महापौर और राज्य के खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग से कार्रवाई की मांग की है। ये फिलहाल शिकायतकर्ता के आरोप और मांग हैं; किसी अधिकारी के दोषी होने का अंतिम निष्कर्ष सक्षम जांच या न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही निकलेगा।
मरीजों के भरोसे से जुड़ा रिकॉर्ड
सरकारी और महानगरपालिका अस्पतालों में दवा खरीद, बैच नंबर, एक्सपायरी तारीख, वितरण और नष्ट किए गए स्टॉक का रिकॉर्ड नियमित रूप से सुरक्षित रहना चाहिए। जांच रिपोर्ट उपलब्ध न होने पर यह सत्यापित करना कठिन हो जाता है कि कमियां ठीक की गईं या नहीं और भविष्य में ऐसी स्थिति रोकने के लिए कौन-से बदलाव किए गए।
वसई-विरार में स्वास्थ्य एवं प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़े मामलों पर MCS पहले भी रिपोर्ट करता रहा है। VVCMC की व्यवस्थागत जवाबदेही पर विस्तृत रिपोर्ट और वसई में FDA कार्रवाई और खाद्य आपूर्ति शृंखला की पड़ताल इसी व्यापक सार्वजनिक स्वास्थ्य संदर्भ को समझने में उपयोगी हैं।
अब महानगरपालिका से अपेक्षा होगी कि वह जांच समिति की रिपोर्ट की वास्तविक स्थिति, दस्तावेज की अभिरक्षा और की गई कार्रवाई का प्रमाणित विवरण सार्वजनिक करे। ऐसा होने पर ही आरोपों और प्रशासनिक तथ्य के बीच का अंतर स्पष्ट हो पाएगा।




