वसई-विरार: निदान हेल्थकेयर के निदेशक डॉ. नितिन थोरवे ने अपने खिलाफ दर्ज मामले में राहत दिलाने के नाम पर पुलिसकर्मियों द्वारा ₹15 करोड़ मांगे जाने का आरोप लगाया है। पुलिस आयुक्त निकेत कौशिक ने इन आरोपों की जांच सहायक पुलिस आयुक्त स्तर पर कराने का निर्देश दिया है। संबंधित अधिकारी ने आरोपों को गलत बताया है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्या आरोप लगाए गए

थोरवे ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि उन्हें मामले का निपटारा कराने और आरोपों से राहत देने के लिए संपर्क किया गया। उन्होंने कुछ पुलिस अधिकारियों के नाम लेकर पैसों की मांग का आरोप लगाया। यह उनका आरोप है; जांच में इसकी सत्यता तय होना बाकी है।

पुलिस का उपलब्ध जवाब

एसीपी क्राइम नितिन पाटिल के हवाले से 28 अक्टूबर की रिपोर्ट में बताया गया कि थोरवे का बयान दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि थोरवे उस समय तक मांग के आरोप को पुष्ट करने वाला साक्ष्य नहीं दे सके थे। जांच जारी है। यह बयान पूरी जांच का अंतिम निष्कर्ष नहीं है।

जिन अधिकारियों के बारे में आरोप लगाए गए, उनमें रूपेश दलवी ने इनकार किया है। उनका कहना है कि मूल मामला बोलिंज पुलिस स्टेशन में दर्ज होने के बाद जांच के लिए एंटी-एक्सटॉर्शन सेल को सौंप दिया गया था। आरोप लगाने वाले पक्ष और संबंधित अधिकारी की बात अलग-अलग है।

मूल विवाद किस बारे में है

जुलाई में थोरवे के खिलाफ करीब ₹20 करोड़ की कथित धोखाधड़ी का मामला दर्ज होने की जानकारी सामने आई थी। मामला विरार की जमीन के पुराने सौदे से जुड़ा बताया गया है। थोरवे ने अपने खिलाफ धोखाधड़ी के आरोप भी नकारे हैं। कथित जमीन विवाद और पुलिस पर लगाए गए पैसे मांगने के आरोप दो अलग जांच योग्य विषय हैं।

अभी जांच का चरण

मौजूदा नया घटनाक्रम आरोपों पर जांच सौंपना और बयान दर्ज होना है। किसी अधिकारी का दोष सिद्ध नहीं हुआ है। मूल शिकायत, बातचीत और लेनदेन के साक्ष्य की जांच से आगे की स्थिति स्पष्ट होगी। उपलब्ध जानकारी किसी पक्ष के आरोपों को अंतिम रूप से सही या गलत साबित नहीं करती।