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VVCMC में अवैध निर्माण और अधिकारियों की भूमिका पर जांच की मांग: डॉ. भरतभूषण वर्मा की शिकायत पर स्वाती देशपांडे ने दिए कार्रवाई के निर्देश

डॉ. भरतभूषण वर्मा की शिकायत पर VVCMC का प्रशासनिक पत्र, अतिरिक्त आयुक्त दीपक सावंत और आयुक्त पृथ्वीराज बीपी की तस्वीरों वाला न्यूज थंबनेल
डॉ. भरतभूषण वर्मा की शिकायत पर VVCMC ने आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।

वसई-विरार | मेट्रो सिटी समाचार | 17 अक्टूबर 2026 : वसई-विरार शहर महानगरपालिका (VVCMC) में कथित अवैध निर्माण, बिल्डरों के खिलाफ कार्रवाई में लापरवाही और वरिष्ठ अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक घटनाक्रम सामने आया है। शिकायतकर्ता डॉ. भरतभूषण एम. वर्मा द्वारा महानगरपालिका आयुक्त को दी गई विस्तृत शिकायत के बाद आस्थापना विभाग की उपायुक्त स्वाती देशपांडे की ओर से संबंधित विभाग को आवश्यक कार्रवाई करने तथा उसकी जानकारी मुख्यालय को देने के निर्देश जारी किए गए हैं।

डॉ. वर्मा ने अपनी शिकायत में अतिरिक्त महानगरपालिका आयुक्त दीपक सावंत की कार्यप्रणाली की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की थी। इसके अलावा शहर में बड़े पैमाने पर कथित अनधिकृत निर्माण, निर्माण स्थलों पर अनिवार्य सूचना बोर्ड लगाने के नियमों की अनदेखी और कुछ अधिकारियों के खिलाफ लंबित शिकायतों का मुद्दा भी उठाया था।

हालांकि, महानगरपालिका के उपलब्ध प्रशासनिक पत्र से स्पष्ट होता है कि फिलहाल संबंधित विभाग को शिकायत पर आवश्यक कार्रवाई करने और उसका विवरण प्रस्तुत करने को कहा गया है। दीपक सावंत के खिलाफ स्वतंत्र विभागीय जांच शुरू करने, उन्हें पद से हटाने या निलंबित करने का कोई स्पष्ट आदेश इस पत्र में दर्ज नहीं है।

7 अगस्त को डॉ. भरतभूषण वर्मा ने आयुक्त से की थी शिकायत

डॉ. भरतभूषण वर्मा ने 7 अगस्त 2026 को वसई-विरार महानगरपालिका आयुक्त को चार पन्नों का शिकायत पत्र भेजा था।

पत्र का विषय अतिरिक्त महानगरपालिका आयुक्त दीपक सावंत के आचरण और कामकाज की जांच तथा उचित प्रशासनिक कार्रवाई की मांग से संबंधित था।

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि महानगरपालिका क्षेत्र में लंबे समय से अनधिकृत निर्माण गतिविधियां जारी हैं। ऐसी गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई करने वाली प्रशासनिक व्यवस्था और वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी की निष्पक्ष समीक्षा जरूरी है।

डॉ. वर्मा का कहना था कि केवल अवैध निर्माण करने वालों की जांच पर्याप्त नहीं होगी। यह भी देखा जाना चाहिए कि संबंधित शिकायतें महानगरपालिका में कब प्राप्त हुईं, उन पर क्या कार्रवाई की गई और अधिकारियों ने अपने वैधानिक दायित्वों का पालन किया या नहीं।

चार लाख कथित अवैध निर्माणों का मुद्दा उठाया

शिकायत में महानगरपालिका के Property Tax Records का उल्लेख करते हुए वसई-विरार क्षेत्र में लगभग चार लाख अनधिकृत निर्माण होने का दावा किया गया।

डॉ. वर्मा ने कहा कि यदि यह आंकड़ा सही है, तो यह केवल कुछ निर्माणकर्ताओं तक सीमित समस्या नहीं, बल्कि महानगरपालिका की पूरी Enforcement व्यवस्था की प्रभावशीलता से जुड़ा मामला है।

उन्होंने मांग की कि बड़े अनधिकृत निर्माण प्रोजेक्ट्स का व्यापक ऑडिट कराया जाए। इसमें मंजूर Building Plans, Construction Permissions, Commencement Certificates, Occupation Certificates और संबंधित विभागीय रिकॉर्ड की जांच की जाए।

हालांकि, चार लाख निर्माणों का आंकड़ा शिकायतकर्ता का दावा है। उपलब्ध दस्तावेज में महानगरपालिका की ऐसी कोई प्रमाणित सूची संलग्न नहीं है, जिससे इस संख्या की स्वतंत्र पुष्टि हो सके।

कई निर्माणकर्ताओं और व्यक्तियों के नाम भी शिकायत में

डॉ. वर्मा ने मंगलमूर्ति कंस्ट्रक्शन के कथित 33 भवनों तथा अरशद चौधरी, सहज़ाद चौधरी, यूसुफ कुरैशी, दारा सिंह और रंधा सिंह से जुड़ी कथित निर्माण गतिविधियों का भी उल्लेख किया।

इनके संदर्भ में पेल्हार, गोखीवरे, चिंचोटी, ससूनवघर और राजावली जैसे क्षेत्रों की जानकारी दी गई।

शिकायत में कुछ निर्माण गतिविधियों का पैमाना लगभग 20 लाख वर्गफुट से अधिक होने का दावा किया गया है।

डॉ. वर्मा ने संबंधित प्रोजेक्ट्स की अनुमतियों और वास्तविक निर्माण का मिलान कराने की मांग की।

यहां स्पष्ट है कि शिकायत में नाम आने मात्र से संबंधित व्यक्तियों या निर्माणकर्ताओं के खिलाफ आरोप प्रमाणित नहीं होते। निर्माणों की वैधता का निर्धारण स्वीकृत रिकॉर्ड और सक्षम प्राधिकारी की जांच के बाद ही हो सकता है।

24 जुलाई के निर्देशों के पालन पर भी सवाल

डॉ. वर्मा की शिकायत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा निर्माण स्थलों पर अनिवार्य सूचना बोर्ड लगाने से संबंधित है।

शिकायतकर्ता के मुताबिक, 24 जुलाई 2026 को अतिरिक्त आयुक्त दीपक सावंत को निर्माण स्थलों पर स्वीकृत कार्यादेश की जानकारी प्रदर्शित करने संबंधी Circular जारी करने के निर्देश दिए गए थे।

उनका आरोप है कि इन निर्देशों के बावजूद आवश्यक Circular जारी नहीं किया गया।

इस मामले में डॉ. वर्मा ने प्रशासनिक जवाबदेही तय करने और संबंधित रिकॉर्ड की जांच करने की मांग की थी।

दो अन्य अधिकारियों की लंबित शिकायतों पर भी कार्रवाई की मांग

डॉ. वर्मा ने सहायक आयुक्त स्तर के अधिकारियों गिल्सन गोंसाल्विस और दयानंद मानकर के खिलाफ कथित लंबित शिकायतों का भी मुद्दा उठाया।

उन्होंने कहा कि यदि इन अधिकारियों के विरुद्ध शिकायतें कई वर्षों से बिना अंतिम निर्णय के लंबित हैं, तो ऐसे मामलों की स्थिति और देरी के कारणों की जांच होनी चाहिए।

इसके अलावा शिकायतकर्ता ने अनधिकृत निर्माणों की कथित खरीद-बिक्री में इस्तेमाल हो रहे Notarized Agreements का मुद्दा उठाते हुए संबंधित दस्तावेजों की भी जांच कराने की मांग की।

दीपक सावंत के खिलाफ डॉ. वर्मा की छह प्रमुख मांगें

अपने शिकायत पत्र में डॉ. वर्मा ने महानगरपालिका से निम्न कार्रवाई की मांग की थी:

  1. अतिरिक्त आयुक्त दीपक सावंत की कार्यप्रणाली और अनधिकृत निर्माणों से जुड़े Enforcement कार्यों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए।

  2. संबंधित अवधि के प्रमुख कथित अनधिकृत निर्माण प्रोजेक्ट्स का Comprehensive Audit हो।

  3. निर्माण स्थलों पर अनिवार्य सूचना बोर्ड लगाने संबंधी निर्देशों के कथित उल्लंघन की जांच हो।

  4. जिन अधिकारियों ने अपने कर्तव्यों में लापरवाही बरती या अनधिकृत निर्माण रोकने में विफल रहे, उनकी जवाबदेही निर्धारित की जाए।

  5. निष्पक्ष जांच के हित में आवश्यकता होने पर दीपक सावंत को Enforcement और Regulation से संबंधित जिम्मेदारियों से अस्थायी रूप से अलग करने पर विचार किया जाए।

  6. जांच के निष्कर्षों के आधार पर आवश्यक विभागीय, प्रशासनिक या कानूनी कार्रवाई की जाए।

इन मांगों के साथ शिकायतकर्ता ने RTI रिकॉर्ड, नोटिस, तस्वीरें और अन्य दस्तावेज जांच के दौरान उपलब्ध कराने की भी बात कही थी।

अब बड़ा सवाल: स्वाती देशपांडे ने क्या कार्रवाई की?

डॉ. वर्मा की शिकायत के बाद महानगरपालिका के आस्थापना विभाग से संबंधित उपायुक्त को एक आधिकारिक पत्र भेजा गया।

उपलब्ध दस्तावेज के पहले पन्ने पर दर्ज पत्र में 7 अगस्त 2026 की शिकायत का संदर्भ दिया गया है।

इस पत्र के माध्यम से शिकायत में उठाए गए मुद्दों को संबंधित विभाग के अधिकार क्षेत्र में बताते हुए अपने स्तर पर आवश्यक कार्रवाई करने, शिकायतकर्ता को उसकी जानकारी देने तथा कार्रवाई की एक प्रति आस्थापना विभाग के मुख्यालय में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

इससे यह स्पष्ट होता है कि शिकायत को विभागीय कार्रवाई के लिए आगे बढ़ाया गया है।

लेकिन यहां डॉ. वर्मा की मूल मांग और आस्थापना विभाग द्वारा दिए गए निर्देश के बीच महत्वपूर्ण अंतर है।

डॉ. वर्मा ने स्वतंत्र जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग की थी, जबकि स्वाती देशपांडे की ओर से जारी प्रशासनिक पत्र में संबंधित विभाग को आवश्यक कार्रवाई और उसका विवरण देने को कहा गया है।

उपलब्ध पत्र में स्वतंत्र जांच समिति गठित करने, दीपक सावंत के खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने, उन्हें किसी जिम्मेदारी से हटाने या दंडात्मक कार्रवाई करने का स्पष्ट निर्देश नहीं मिलता।

क्या शिकायत की जांच होगी या केवल विभागीय जवाब आएगा?

अब इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यही है।

डॉ. वर्मा की शिकायत वरिष्ठ अधिकारी की कार्यप्रणाली और महानगरपालिका की Enforcement व्यवस्था पर सवाल उठाती है। ऐसे में प्रशासन को यह स्पष्ट करना होगा कि शिकायत की जांच किस स्तर पर होगी और क्या आरोपों का स्वतंत्र सत्यापन किया जाएगा।

केवल संबंधित विभाग से स्पष्टीकरण लेना और किसी अधिकारी की भूमिका की स्वतंत्र जांच करना, दोनों अलग-अलग प्रशासनिक प्रक्रियाएं हैं।

स्वाती देशपांडे के पत्र के आधार पर अभी इतना ही कहा जा सकता है कि शिकायत को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजा गया है। शिकायत में लगाए गए आरोपों पर अंतिम प्रशासनिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है।

Metro City Samachar के प्रशासन से महत्वपूर्ण सवाल

इस मामले में महानगरपालिका प्रशासन से कुछ सवालों के स्पष्ट जवाब अपेक्षित हैं।

क्या डॉ. वर्मा की शिकायत के सभी छह प्रमुख बिंदुओं पर अलग-अलग जांच होगी? क्या दीपक सावंत के खिलाफ लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र जांच पर निर्णय लिया गया है? शिकायत में नामित निर्माण गतिविधियों का रिकॉर्ड सत्यापन किस अधिकारी को सौंपा गया है?

इसके अलावा निर्माण स्थलों पर सूचना बोर्ड से संबंधित 24 जुलाई के कथित निर्देशों की स्थिति क्या है? लंबित विभागीय शिकायतों पर अब तक क्या कार्रवाई हुई है? और शिकायतकर्ता को अंतिम Action Taken Report कब तक मिलेगी?

इन सवालों के जवाब से ही स्पष्ट होगा कि महानगरपालिका का पत्र केवल प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है या इसके आधार पर आगे व्यापक जांच और जवाबदेही तय करने की कार्रवाई भी होगी।

दीपक सावंत और अन्य संबंधित पक्षों का पक्ष आना बाकी

डॉ. वर्मा के पत्र में लगाए गए आरोप शिकायतकर्ता के दावे हैं। उपलब्ध दस्तावेजों में अतिरिक्त आयुक्त दीपक सावंत, अन्य नामित अधिकारियों या निर्माणकर्ताओं के स्पष्टीकरण शामिल नहीं हैं।

इसलिए किसी अधिकारी या व्यक्ति को दोषी मानने का निष्कर्ष इस पत्राचार से नहीं निकाला जा सकता।

संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया और महानगरपालिका की अंतिम कार्रवाई रिपोर्ट सामने आने पर मामले की वास्तविक स्थिति और स्पष्ट होगी।

अब कार्रवाई रिपोर्ट पर टिकी निगाहें

डॉ. भरतभूषण वर्मा की 7 अगस्त की शिकायत और उसके बाद स्वाती देशपांडे के विभाग से जारी पत्र ने वसई-विरार महानगरपालिका में कथित अनधिकृत निर्माण और अधिकारियों की जवाबदेही का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।

शिकायतकर्ता ने जहां स्वतंत्र जांच, निर्माण प्रोजेक्ट्स का ऑडिट और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की, वहीं महानगरपालिका ने संबंधित विभाग को आवश्यक कार्रवाई कर उसका विवरण देने के निर्देश दिए हैं।

अब देखना होगा कि प्रशासन शिकायत में उठाए गए सवालों पर क्या ठोस कदम उठाता है और संबंधित विभाग की कार्रवाई रिपोर्ट में क्या तथ्य सामने आते हैं।
अतिरिक्त आयुक्त दीपक सावंत की कार्यप्रणाली पर उठाए गए सवाल; स्वतंत्र जांच और प्रशासनिक जिम्मेदारियों से हटाने की मांग पर अभी स्पष्ट निर्णय नहीं, संबंधित विभाग से आवश्यक कार्रवाई कर रिपोर्ट देने को कहा गया

मेट्रो सिटी समाचार इस मामले में महानगरपालिका की आगे की कार्रवाई और संबंधित पक्षों के स्पष्टीकरण को भी प्रमुखता से प्रकाशित करेगा।

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